योग का महत्व Importance of Yoga

योग और योग का महत्व  Yoga and Importance of Yoga in Hindi

योग स्वस्थ जीवन व्यतीत करने की कला तथा विज्ञान है। योग करने का मकसद आत्मज्ञान की प्राप्ति तथा सभी प्रकार की शारीरिक परेशानियों को दूर करना है। योग मनुष्य के मन और आत्मा की अनंत क्षमता को बढ़ाकर आत्मज्ञान की प्राप्ति करवाता है। योग करने से हमें अच्छी नींद आती है तथा हमारा शरीर स्वस्थ और तंदुरुस्त रहता है। योग से हमें शांति तथा आनंद प्राप्त होता है। योग से हमारा मस्तिष्क एकाग्रचित होकर काम करता है तथा हमारे मन में अच्छे विचारों का निवास होता है। योग हमारे शरीर को स्वस्थ, लचीला तथा शक्तिशाली भी बनाए रखता है। इस ब्लॉग में हम योग और योग का महत्व  Yoga and  Importance of yoga जानने  प्रयास करेंगे।  

योग का इतिहास  History of Yoga

योग का इतिहास History of Yoga

योग शब्द संस्कृत है ‘यूज’से बना है जिसका अर्थ है जोड़ना ( स्वयं का सर्वश्रेष्ठ या स्वयं के साथ मिलान )और योग मन को आत्मा के साथ जोड़ता है। योग का जन्म  सिंधु घाटी की सभ्यता से  माना जाता है (इंडस वैली सिविलाइजेशन)| वहां की खोज से हमें पता चला है कि वहां के लोग योगाभ्यास करते थे। सिंधु घाटी में जो शारीरिक मुद्राएं और आसन के चित्र मिले थे वह आज के समय में हो रहे योग से काफी भिन्न थे। 

पश्चिमी विद्वान मानते हैं कि, योग का जन्म 500 ईसवी से पुराना है। उनके अनुसार जब बौद्ध धर्म अस्तित्व में आया तब से ही योग हो रहा है परंतु हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो की खुदाई से हमें ज्ञात हुआ कि योगा 5000 वर्षों  के पहले से ही हो रहा था। 

वैदिक काल में योग को एकाग्रता हासिल करने और सांसारिक मुश्किलों को खत्म करने के लिए किया जाता था। महाभारत तथा भगवत-गीता में योग के बारे में कहा गया है कि “जिस व्यक्ति में दूसरों के प्रति विनम्रता, श्रद्धा, भावना होती है वह मनुष्य ही एक श्रेष्ठ अवस्था प्राप्त कर सकता है”और इस युग में योग को चार भागों में वर्णित किया- ज्ञान योग, भक्ति योग, कर्म योग और राज योग। 

शास्त्रीय तथा पोस्ट शास्त्रीय अवधि के लोगों ने शारीरिक मुद्राओं तथा सांस लेने की तकनीकों को योग के साथ जोड़ा और उन्होंने ध्यान तथा समाधि को ज्यादा महत्त्व दिया। उसके बाद पतंजलि ऋषि ने राजयोग पर विशेष ध्यान दिया। उनके बाद पतंजलि अनुयायियों ने आसन, शरीर और मन की सफाई, क्रियाएं और प्रणायाम को महत्त्व दिया। 

आधुनिक काल में स्वामी विवेकानंद ने शिकागो की एक धर्म संसद में योग की विशेषताओं का उल्लेख किया और पूरे विश्व को योग से परिचित कराया। उनके बाद महर्षि महेश, योगी परमाहंसा, योगानंद रमन महर्षि जैसे कई योगियों ने अपना योगदान दिया।

योग के प्रकार Types of Yoga

योग के प्रकार Types of Yoga

योग के चार प्रकार हैं- राजयोग ज्ञान योग कर्म योग भक्ति योग हठयोग कुंडली में योग

राजयोग

 राजयोग को सभी योगों का राजा माना जाता है क्योंकि राज्यों के सभी योगों की कोई ना कोई खासियत हैऔर राज्यों हर कोई कर सकता है महर्षि पतंजलि ने इस योग के अंतर्गत अष्टांग योग रखा है और यह अष्टांग योग हैं –

  • यम (शपथ)
  • नियम (आत्म अनुशासन)
  • आसन (मुद्रा) 
  • प्राणायाम (सुभाष नियंत्रण)
  • प्रत्याहार (इंद्रियों का  नियंत्रण )
  • धारणा (एकाग्रता) 
  • ध्यान (मेडिटेशन)
  • समाधि (बंधनों से मुक्ति या परमात्मा से मिलाप)

ज्ञान योग

यह योग ध्यान और मन से परिचित कराता है।  इस योग से विचारों में शुद्धता आती है और अध्ययन करने से बुद्धि का विकास होता है। यह योग सबसे कठिन होता है क्योंकि इसमें मन को एकाग्रचित्त करके आत्मा से मिलाप करना होता है और यह करने के लिए काफी अभ्यास की जरूरत होती है। 

कर्म योग

कर्म योग का मतलब है कर्म में लीन होना यानी कार्य करना। इस योग के माध्यम से इंसान किसी भी मोह-माया में बंधे बिना अपना सांसारिक कार्य करता है तथा परमेश्वर में  लीन हो जाता है। 

भक्ति योग

भक्ति योग को कोई भी कर सकता है। हर मनुष्य किसी न किसी रूप में अपने इष्ट पूजा करता है।भक्ति योग में हृदय में प्रेम और ईश्वर से जुड़ना होता है। 

प्रमुख योग आसन Main Yoga posture

प्रमुख योग आसन Main Yoga postures

वीरभद्रासन

इस आसन को करने से पैरों तथा भुजाओं में शक्ति मिलती है। 

इस आसन को खड़े होकर,अपने पैरों के बिच 3-4 फ़ीट की दूरी रखकर लम्बी साँस लेकर दोनों हाथों को जमीन के समांतर ऊपर उठाकर अपने सिर को दाएं तरफ मोड़ें फिर साँस छोड़कर दाएँ पैर को 90 डिग्री में दाएँ तरफ मोड़ें। इस पोजीशन में कुछ देर रूककर फिर दूसरी तरफ दोहराएं। इस योग को 3 -4 बार दोहराएं। 

वृक्षासन 

इस आसन को करने से शारीरिक संतुलन बना रहता है। यह आसन जांघों ,पैर और रिड की हड्डी को मजबूत बनता है। 

इस आसन को खड़े होकर दोनों हाथों को बगल में रखना है। उसके बाद दाहिने पैर को अपने बाएं जांग पर रखकर सीधे खड़ा होना है। धीरे -धीरे दोनों हाथों को जोड़कर ऊपर लेजाकर प्रार्थना मुद्रा में रहना है और कम से कम 30 -45 सेकंड तक इसी मुद्रा में रहना है। इस योग को दूसरी तरफ भी दोहराएं। 

अर्ध चंद्रासन 

यह आसन पूरे शरीर के लिए लाभदायक होता है,शरीर लचीला तथा गर्भाशय व मूत्र संबंधित रोगों से लाभकारी भी होता है। 

इस आसन को खड़े होकर अपने शरीर को दाहिने तरफ मोड़ें और दोनों हाथों को सीधे ऊपर  करके अपने शरीर की तरफ ही घुमाएं। इस मुद्रा में 30 -45 सेकंड तक रूकें और इसे दूसरी तरफ भी दोहराएं। इस आसन में शरीर को आधे चंद्र के आकार में घुमाया जाता है 

भुजंगासन  

इस आसन को करने से कमर दर्द की परेशानियां दूर होती है। यह आसन पीठ व मेरुदंड के लिए मददगार है और गैस व मोटापा कम करने में मदद करता है। 

इस को पेट के बल लेटकर एक लम्बी साँस के साथ अपने शरीर के ऊपरी भाग (सिर ,गर्दन ,कन्धों और छाती )को ऊपर उठाकर किया जाता है। इस मुद्रा में 20 -30 सेकंड तक रूककर तथा इस क्रिया को 4 -5 बार दोहराया जाता है। 

बाल आसन

बालासन शरीर को संतुलित करता है तथा रक्त संचार को सामान्य बनाए रखता है। बालासन से तनाव भी दूर होता है। 

इस आसन को करने के लिए जमीन पर अपने घुटनों के बल बैठकर फिर एक लम्बी साँस लेकर धीरे -धीरे आगे की तरफ झुकें और अपनी साँस छोड़ें। अपने हाथों को सीधे जमीन पर हथेलियों को नीचे की तरफ करके रखें और इस मुद्रा में 30 -45 सेकंड तक रहें तथा धीरे -धीरे साँस ले और छोड़ें। 

मार्जरी आसन 

यह आसन शरीर को सक्रिय बनाने तथा ऊर्जावान बनाने में सहायक है। इस आसन से शरीर का लचीलापन भी बढ़ता है। 

मार्जरी आसन को करने के लिए अपने घुटनों और हाथों के बल आकर घोड़े के जैसे अपने हाथों के बिलकुल सीधा रखें। साँस छोड़ते हुए सिर को छाती की तरफ लाएं  तथा कमर को बाहर की तरफ  गोल करें ऐसा करने से पीठ में  खिचाव आएगा। फिर सांस लेते हुए सिर को ऊपर की ओर लेकर जाएं और कमर  अंदर  ओर  करें। इस आसन को 2 -3 बार दोहराएं।  

नटराज आसन

 इस आसन से संतुलन सुधारनें, वजन को कम करने,शरीर का लचीलापन बढ़ाने,तनाव कम करने,फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने और कंधे, बाहे और पैर मजबूत करने में मदद मिलती है। 

इस आसन को करने के लिए सीधे खड़े होकर गहरी साँस लेकर अपने बाएँ पैर को अपनी दाईं जांघ पर रखे और नमस्कार मुद्रा धारण करें। फिर कुछ देर के लिए इसी मुद्रा में रहे और फिर धीरे -धीरे साँस ले और छोड़ें। इस मुद्रा को दूसरी तरफ भी दोहराएं। 

गोमुख आसन 

इस आसन की नियमित अभ्यास करने से शरीर सुडोल बनता है और मांसपेशियां मजबूत रहतीं हैं। 

इस आसन को करने के लिए सुखासन में बैठकर अपने पैरों को आगे करें और बाएं टांग अपने शरीर की तरफ मोड़ें। अपने दाहिने घुटने को उठाकर अपने बाएं पैर को दाएं जांघ के नीचे रखें फिर अपनी दाहिनी टांग को शरीर के तरफ खींचकर बाएं जांघ ऊपर रखें। फिर बाएं हाथ को पीठ पर और दाएं हाथ को ऊपर गर्दन की तरफ से लेजाकर दोनों हाथों को एकदूसरे को पकड़ने की कोशिश करें। आपकी पीठ एकदम सीधी होनी चाहिए और फिर ऑंखें बंद करके इस मुद्रा में 2 मिनट तक रहें। इस आसन को दूसरी तरफ  दोहराएं।  

हलासन 

अभ्यास करने से रीड की हड्डी लचीली रहती है और यह आसन पेट के रोग, थायराइड दमा, रक्त संबंधी रोगों में भी काफी लाभकारी है

इस आसन को पीठ के बल लेटकर अपने दोनों हाथों को जमीन पर सीधा रखकर एक लम्बी सांस लेकर अपने पैरों को थोड़ा ऊपर उठायें और फिर 90 डिग्री पर रोककर रखें तथा फिर साँस लेते हुए अपने कूल्हों को पीठ की मदद से ऊपर उठायें। उसके बाद अपने पैरों को 180 डिग्री तक मोड़ें जब तक की वह  जमीन को न छूह ले। इस आसन को धीरे -धीरे करें।  

सेतु बांध आसन

 इस आसन को करने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है तथा पेट की मांसपेशियां एवं जांघों का अच्छा व्यायाम होता है और शरीर तंदरुस्त होता है। 

इस आसन को लेटकर और फिर दोनों बाजुयों को दोनों तरफ करके अपने शरीर को इस भांति ऊपर उठाना है जिससे आपका शरीर एक पुल बन जाए। एक लम्बी साँस लेनी हैं और उसे 25 -30  सेकंड तक रोककर रखना है। फिर धीरे -धीरे अपने शरीर को नीचे पहली मुद्रा में लेकर आना है। इस योगासन को 4 -5 में दोहराना है। 

सुखासन

यह आसन मन को शांति प्रदान करता है और चिंता ,तनाव और मानसिक थकान से जुड़े रोगों से दूर करता है। इस आसान को करने से लम्बाई बढ़ने,छाती चौड़ी करने में भी लाभ मिलता है। 

इस आसन को बैठकर किया जाता है। चोंकड़ी लगाकर सीधे बैठकर तथा अपने हाथ अपने घुटनों पर रखकर ज्ञान मुद्रा धारण करनी है और धीरे -धीरे साँस लेनी और धीरे -धीरे साँस छोड़नी हैं। 

नमस्कार आसन 

इस आसन को करने से मानसिक तनाव से मुक्ति ,वजन कम करने तथा शरीर को निरोगी और स्वस्थ करने में सहायता मिलती है। 

यह काफी सरल आसन है और इसे किसी भी आसन की शुरुआत में किया जाता है। इस के अन्त्रगत काफी आसन आते हैं –

1 प्रणाम आसन – इसे करने के लिए सीधे खड़े होकर अपने कन्धों को ढीला रखकर सांस लेते हुए अपने दोनों हाथों को जोड़कर ऊपर करें और सांस छोड़ते हुए प्रणाम मुद्रा ग्रहण करें। 

2 हस्तउत्तानासन-इसे करने के लिए सांस लेते हुए हाथों को ऊपर अपने कानों के पास रखा जाता है और शरीर को थोड़ा ऊपर की तरफ खींचना होता है। 

3 हस्तपाद आसन – इसे करने के लिए सांस लेते हुए आगे झुकना और सांस छोड़ते हुए अपने पैरों के पंजों को छूना होता है। 

4 अश्व संचालन आसन -इसे करने के लिए दाहिने पैर को पीछे कर घुटने को जमीन से लगाकर चेहरे को ऊपर लेजाकर ऊपर की तरफ देखना होता है। 

5 दण्डासन -इसे करने के लिए बाएं पैर को पीछे कर शरीर को सीधी रेखा में  किया जाता है। 

6 अष्टांग नमस्कार -इसे करने के लिए मुँह के बल जमीन पर लेटकर धीरे -धीरे अपने कूल्हों को ऊपर उठाना होता है। 

7 भुजंगासन -इसे करने के लिए मुँह के बल जमीन पर लेटकर अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊपर उठाना होता है। 

8 पर्वत आसन -इसे करने के लिए मुँह के बल जमीन पर लेटकर हाथ और पैरों को जमीन पर और बाकि शरीर को ऊपर उठाना होता है। 

ताड़ासन

ताड़ासन मानसिक तथा शारीरिक संतुलन बनाये रखता है। रीड की हड्डी में खिचाव लाता है और शरीर की बनाबट में भी सुधार लाता है। 

इस आसन को करने के लिए सीधे खड़े होकर अपने दोनों हाथों की उँगलियों को पकड़कर सिर के ऊपर लेजाकर सीधा करें होर फिर अपने पंजों पर वजन डालते हुए अपने शरीर को ऊपर उठायें। 

त्रिकोणासन 

इसका अभ्यास करने से शरीर का तनाव दूर होता है और लचीलापन आता है। 

इस आसान को खड़े होकर अपने दोनों पैरों के बीच थोड़ी दूरी रखें और फिर दाएँ पैर को 90 डिग्री में मोड़ें। उसके बाद शरीर को दाएँ तरफ झुकाते हुए अपने पैर की उँगलियों को छूएं और बाएँ हाथ को ऊपर की और सीधे रखकर 1 -2 मिनट तक इसी मुद्रा में रहें। फिर इस क्रिया को दूसरी तरफ भी दोहराएं।

 उष्ट्रासन 

ऊंट के समान मुद्रा इस आसन के करने से शरीर लचीला तथा मजबूत रहता है और फेफड़ों की  क्षमता बढ़ती है। 

इस आसन को करने के लिए अपने पैरों के ऊपर बैठें और फिर अपनी बाजुयों को घुटनों पर रखकर खड़े हो जाएँ। फिर पीछे की तरफ झुककर अपनी एड़ियों को पकड़ने की कोशिश करें। शरीर का वजन पैरों और भुजाओं पर ही होना चाहिए तथा पीठ धनुष के जैसी दिखनी चाहिए। 

ब्रज आसन

इसका अभ्यास करने से शरीर सुढोल बनता है ,पीठ दर्द और कमर दर्द जैसी समस्या में लाभदायक है। 

इस आसन को करने के लिए अपने पैरों को मोड़कर तथा कमर सीधी करके बैठा जाता है। फिर आंखें बंद कर लम्बी सांस लेनी और छोड़नी होती है। 

शवासन 

यह आसन थकान और मानसिक परेशानी को दूर करता है तथा ध्यान/एकाग्रता में सुधार आता है। 

इस आसन को मरे हुए शरीर की तरह लेट कर किया जाता है और दोनों पैरों को अलग -अलग करके रखना है। कुछ मिनटों के लिए धीरे-धीरे साँस लेनी और धीरे -धीरे साँस छोड़नी हैं। 

अनुलोम विलोम

यह आसान डायबिटीज रोगियों  के लिए काफी लाभदायक है। यह मन को शांत रखता है और एकाग्रता बढ़ाता है। यह आसान वजन काम करने तथा पाचन शक्ति बढ़ाने में भी लाभदायक है। 

 इस आसन को बैठकर अपने दाएं पैर को बाएं पैर पर तथा बाएं पैर को दाएं पैर की जांघ पर रखें। अपने दाहिने नाक को दाहिने हाथ के अंगूठे से बंद करें और बाएं नाक से धीरे धीरे गहरी सांस लें और फिर दाहिने नाक पर रखें अंगूठे को हटाकर धीरे -धीरे सांस छोड़ें और सांस छोड़ते समय अपनी उंगली से बाएं नाक को बंद करें। उसके बाद बाएं नाक  बाएं हाथ के अंगूठे से बंद करें और दाएं नाक से सांस ले फिर बाएं तरफ से सांस छोड़ते समय अपने दाईं नाक को बंद कर लें। इस आसन को 10 -15 मिनट तक दोहराया जा सकता है। 

कपाल भारती

कपाल भारती करने से  हृदय और मस्तिष्क रोग दूर रहतें हैं। यह कफ,दमा ,श्वास रोगों में भी लाभदायक है।  यह मस्तिष्क और शरीर में ऊर्जा प्रदान करता है। 

 इस आसन को करने के लिए जमीन पर पैरों के ऊपर बैठकर पीठ को सीधी करके एक लम्बी सांस लेना है जिससे आपका पेट बिलकुल भर जाये और फिर धीरे -धीरे सांस छोड़े ताकि पेट अंदर चला जाये। इसे आप 5 मिनट तक दोहराएं। 

योग करते समय सावधानियां  Precautions while doing yoga 

योग करते समय सावधानियां Precautions while doing yoga

  •  योग करने के लिए ताजा और ठंडी हवा की जरूरत होती है। अगर यह मुमकिन नहीं है तो आप किसी भी खाली जगह पर योगासन कर सकतें हैं।  
  •  योगा करने के लिए किसी ना किसी दरी या कालीन का इस्तेमाल करें। सीधे जमींन पर बिना दरी के बैठकर योगा नहीं करना चाहिए। 
  •  किसी भी योगासन को एकदम से यानि एक झटके से न करें। एक मुद्रा से दूसरी मुद्रा में जाने के लिए जल्दबाजी न करें जिसप्रकार धीरे -धीरे इसकी शुरुआत करतें हैं उसी प्रकार धीरे -धीरे आसन या मुद्रा को बदलते हैं। 
  •  योगासन करने से पहले हमें अपने शरीर को योग के लिए तैयार करने के लिए वार्मअप करना जरूर चाहिए। इसके लिए हलका -फुल्का व्यायाम पहले कर लेना चाहिए जिससे आपका शरीर खुल जाता है और लचीलापन भी आता है। 
  •  भोजन करने के तुरंत बाद हमें योग नहीं करना चाहिए। योग और खाने के बीच 3 से 4 घंटे का फर्क होना चाहिए। 
  •  हमें हमेशा सरल योग से ही शुरुआत करनी चाहिए। 
  • आप जहां भी योगासन करें वहां यह सुनिश्चित करें की वहां का माहौल शांत हो ताकि आपको योग करने का भरपूर फ़ायदा मिल सके। योग करने से जो हमें एकाग्रता हासिल होती है वह शोर-शराबे में नहीं मिल सकती है। 
  • योग करने दौरान ठंडा पानी ना पिये।   
  • योग करने के एकदम बाद न नहाएं क्योंकि योग करने से हमारा शरीर और मांसपेशियां गर्म होतीं हैं और तुरंत बाद नहाने से हमें सर्दी -झुकाम आदि होने की संभावना बढ़ जाती है। 
  • अगर शरीर में कोई तकलीफ या किसी अंग में दर्द की शिकायत है तो योग ना करें और अगर करते समय आपको कोई दर्द महसूस हो रही है तो धीरे -धीरे उस आसन से बाहर निकल आएं।  
  • योग करने के लिए गहने न ही पहने। गहने आपके योग अभ्यास में बाधा डाल सकतें हैं और आपको हानि भी पहुंचा सकतें हैं। 
  • योग को जल्दबाजी में नहीं बल्कि धैर्य रखकर ही करना चाहिए। शुरुआत में हमें उतना ही योग करना चाहिए जितना हम कर सकें और फिर धीरे -धीरे अभ्यास करके उसे बढ़ाये। 
  • योगा करने के लिए तंग कपड़े और ज्यादा खुले कपड़े भी न ही पहने। इसके लिए हमें थोड़े ढीले और सूती कपड़े ही ठीक रहतें हैं। 
  • योग करने के लिए उसकी विधि ,समय ,निरंतरता ,एकाग्रता तथा सावधानियों को अच्छी तरह से जानना जरूरी होता है। 
  • योग सही तरीके से करने के लिए किसी ट्रेनर/एक्सपर्ट की सहायता अवश्य ही लेनी चाहिए तांकि वो हमें सही तरीके और सही अंतराल के बारे में बता सके।  
  • योग करने के पश्चात् थोड़ा आराम ले ताकि आपको पूरा दिन कोई थकावट मेह्सूस न हो। 
  • योग करने का फल हमें कुछ दिनों में नहीं मिलता है इसलिए जल्दी निराश न हों और अभ्यास करना न छोड़े। इसका फल देर जरूर मिलता है पर काफी फायदेमंद होता है। 

योग का महत्व  Importance of Yoga

योग के लाभ

योग के लाभ Benefits of yoga

  • योग करने से हमें शारीरिक तथा मानसिक लाभ मिलता है और योग मांसपेशियों को पुष्टा प्रदान करते हैं। 
  • योग करने से हमारा शरीर स्वस्थ, निरोग और बलवान बनता है और योगाभ्यास करने से कई रोगों से लड़ने की शक्ति भी मिलती है। 
  • योग मधुमेह की बीमारी का इलाज करने में सहायक है। योग करने से ब्लड शुगर (SUGAR )का लेवल कम रहता है और यह डायबिटीज (DIABETIES )के मरीजों के लिए फायदेमंद है
  • कई योगासन शारीरिक बीमारियों या दर्द को कम करने के लिए किए जाते हैं। कई योगासन करने से हमें दवाइयों की कम जरूरत पड़ती है और योग से हमारी दर्द सहने की क्षमता भी बढ़ती है। 
  • ध्यान यानी मेडिटेशन करने से मानसिक तनाव दूर होता है तथा आत्मिक शांति महसूस होती है। 
  • रोजाना योग अभ्यास करने से अच्छा व्यायाम होता है जिससे हमें अच्छी नींद आती है और काम करने की शक्ति भी बढ़ती है। 
  • मेडिटेशन से एकाग्रता तथा धारणा शक्ति भी बढ़ती है
  • प्राणायाम एवं ध्यान योग से श्वास-प्रश्वास गति पर नियंत्रण रखने से हमें सांस की दिक्कत या इससे संबंधित रोगों में फायदा मिलता है। प्राणायाम करने से फेफड़ों की ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है जिसका असर हमारे पूरे शरीर पर होता है। 
  • कृष और स्थूल योगासन व्यक्ति को ताकतवर और बलवान बनाता है तथा इसका नियमित अभ्यास करने से शरीर में फालतू वसा कम रहता है।
  • योग करने से हमें गैस की समस्या से मुक्ति मिलती है तथा हमारी पाचन शक्ति भी ठीक रहती है और हमें भूख भी अच्छे से लगती है। 
  • योग पेट का मोटापा कम करने के लिए भी लाभकारी है तथा यह दिल को हमेशा जवान रखता है। 
  • योगाभ्यास करने से मन को शांति मिलती है और योग हमारे मस्तिष्क व विचारों पर भी असर डालता है। 
  • नियमित अभ्यास करने से मनुष्य चिंताओं से मुक्त हो जाता है और रक्त का संचार भी बेहतर तरीके से हो पाता है। इससे हृदय संबंधी रोगों का खतरा भी कम हो जाता है।  
  • योग करने से बीमारियों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है और आप स्वस्थ रहते हैं। 
  • योग हमारे जीवन को सकारात्मक तरीके से जीने और काम करने की ऊर्जा प्रदान करता है। योग करने से हमारी थकावट दूर होती है तथा हमें नई उर्जा प्राप्त होती है। 
  • योग बढ़ती उम्र को कम करता है। रोजाना अभ्यास करने से चेहरे पर झुर्रियां कम हो जाती हैं क्योंकि तनाव के कारण ही समय से पहले बुढ़ापा नजर आने लग जाता है और योग अभ्यास तनाव को दूर करता है। 
  • योगाभ्यास करने से हड्डियां तथा मांसपेशियां मजबूत होती हैं, शरीर का आकार तथा शारीरिक क्षमता बेहतर होती है। 
  • योगाभ्यास करने से शरीर में लचीलापन आता है तथा सहनशीलता में वृद्धि होती है। योग हमारे मस्तिष्क को बेहतर बनाता है मस्तिष्क की कार्य प्रणाली या याद करने की क्षमता भी अच्छी होती है। 
  • गर्भावस्था में भी योग के काफी लाभ होते हैं।गर्भावस्था में योग करने से शरीर को ताकत मिलती हैं,थकावट और चिंता से मुक्ति मिलती है तथा आपकी मांसपेशियां लचीली होती हैं। योग करने से गर्भावस्था में नींद ना आना,कमर दर्द, पैरों में खिंचाव, पाचन शक्ति का बिगड़ना आदि मुश्किलों से मुक्ति मिलती है।  गर्भावस्था में किए जाने वाले योग करने के लिए अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें तांकि वह आपको यह बता सके की आपको कौन सी मुद्राएं करनी हैं ?कौन सी नहीं और कितने समय तक करनी है। 

योग के नुक्सान Side effects of yoga

योग हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है इसके बहुत से लाभ हैं लेकिन अगर हम योग को सुचारु तरीके से न करें तो इसके नुक्सान भी देखने को मिलतें हैं। जैसे की –

  •  योग करने से हमें थकावट महसूस होती है क्योंकि कई बार हम अपने शरीर की क्षमता से ज्यादा अभ्यास करने लग जातें हैं। 
  • योग को नियमित रूप से करने यह आपकी एक आदत भी बन जाती है और अगर किसी कारण आप योग नहीं कर पाए तो आपको कुछ भी अच्छा नहीं लगेगा। 
  • अगर आप अपनी जरूरत से ज्यादा अपनी मांसपेशियों को खींचेंगे तो आपको लकवा मारने का डर भी रहता है। 
  • कई बार योग अभ्यास करने या दूसरों को देखकर उनके जैसा बनने के विचार भी हावी हो जातें हैं। 
  • कई बार गलत योग करने या गहने पहनकर योग करने से हमें चोट भी लग सकती है। 
  • कई लोगों में पाया गया है की उनके टेस्टेस्टरोन हार्मोन बढ़ने के कारण उन्हें गुस्सा अधिक आता है। 
  • कई लोगों में पाया गया है की उनकी जिह्व का स्वाद ही बदल गया है जो चीजें वह योग शुरू करने से पहले कहते थे अब उन्हें नापसंद है। 

योग और योग का महत्व  Yoga and Importance of Yoga की और जानकारी के लिए यह भी पढ़े।

सारांश – योग और योग का महत्व  Yoga and Importance of Yoga

हम यह आशा करते है की इस पोस्ट ” योग और योग का महत्व  Yoga and Importance of Yoga” में आपको  अच्छी जानकारी मिली होगी ।

चलो हम अब इस ब्लॉग “योग और योग का महत्व  Yoga and Importance of Yoga” का सार जानने का प्रयास करते है।

  • योग का जन्म  सिंधु घाटी की सभ्यता से  माना जाता है
  • योग के चार प्रकार हैं
  • योग के कई आसन हैं।
  • योग करते समय सावधानियां भी लेनी चाहिए।
  • योग करने के कई लाभ हैं।
  • योग करके कुछ नुक्सान भी हो सकता है।
  • योग का भारत में बहुत महत्व है। Yoga is having great Importance in India

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