श्री हेमकुंड साहिब यात्रा

श्री हेमकुंड साहिब और फूलो की घाटी की यात्रा 2022 (Shri Hemkund sahib and Valley of flowers yatra)

इस ग्रह का सबसे युवा और सबसे ऊँचा पर्वतमाला हिमालय है। इसने भारतीय उपमहाद्वीप में पनपी सभ्यता को आकार दिया है। हिमालय पर्वतमाला में कई धार्मिक स्थल हैं, जिनमें से एक है श्री हेमकुंट साहिब। श्री हेमकुंड साहिब दुनिया का सबसे ऊंचा सिखों का गुरुद्वारा (पूजा स्थल) है। इस ब्लॉग में आपको हम श्री हेमकुंड साहिब यात्रा (Shri Hemkund sahib yatra) के बारे में पूरी जानकारी देंगे।

फूलों की घाटी भारत का एक राष्ट्रीय उद्यान है जो अपने फूलों और घास के मैदानों के लिए जाना जाता है। ये घास के मैदान स्थानिक अल्पाइन फूलों और वनस्पतियों की एक महान विविधता के हैं।

श्री हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी कहाँ स्थित है ( where is Shri Hemkund sahib and Valley of flowers located ?)

Table of Contents

पश्चिमी हिमालय (उत्तर भारत) की गोद में, श्री हेमकुंड साहिब सिखों के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। यह उत्तराखंड के चमोली जिले में बद्रीनाथ के पास एक ऊंचाई वाली बर्फीली झील के किनारे में
स्थित है और इसकी ऊंचाई  4160 मीटर (13650 फीट) है।

फूलों की घाटी (Valley of flowers)
फूलों की घाटी

फूलों की घाटी 3300 मीटर से 3500 मीटर की ऊंचाई पर श्री हेमकुंट साहिब के पास स्थित है।

श्री हेमकुंड साहिब का इतिहास (History of Shri Hemkund Sahib)

श्री हेमकुंड साहिब का इतिहास सिखों के 10वे गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी (1666 – 1708 ईस्वी) के साथ जुड़ा हुआ है।  गुरुजी ने अपनी आत्मकथा में इस स्थान के बारे बताया है. उन्होंने यह जानकारी वचित्तर नाटक नमक लेख में दी है । उन्होंने कहा कि इस जगह पर, सप्त श्रृंग पर्वतमाला में, हेमकुंट पर्बत स्थित है। उन्होंने अपने पूर्व जन्म के समय सर्वशक्तिमान ईश्वर (निर्माता) का ध्यान किया। इसी स्थान पर राजा पांडु ने योग का अभ्यास किया।

गुरुजी के शब्द जो वचित्तर नाटक में दर्ज है

अब मै अपनी कथा बखानो ॥ तप साधत जिह बिधि मुहि आनो ॥

हेम कुंट पर्बत है जहां ॥ सपत स्रिंग सोभित है तहां ॥१॥

सपत स्रिंग तिह नामु कहावा ॥ पंडु राज जह जोगु कमावा ॥

तह हम अधिक तपसिआ साधी ॥ महाकाल कालका अराधी ॥२॥

इह बिधि करत तपिसआ भयो ॥ द्वै ते एक रूप ह्वै गयो ॥

तात मात मुर अलख अराधा ॥ बहु बिधि जोग साधना साधा ॥३॥

तिन जो करी अलख की सेवा ॥ ता ते भए प्रसंनि गुरदेवा ॥

तिन प्रभ जब आइस मुहि दीआ ॥ तब हम जनम कलू महि लीआ ॥४॥

चित न भयो हमरो आवन कहि ॥ चुभी रही स्रुति प्रभु चरनन महि ॥

जिउ तिउ प्रभ हम को समझायो ॥ इम किह कै इह लोकि पठायो ॥५॥

श्री गुरु गोबिंद सिंह जी

अर्थात

  • अब मैं अपनी कहानी से सम्भोदित करता हूं कि मुझे यहां कैसे लाया गया, जब मैं गहन ध्यान में लीन था।
  • हेमकुंट नामक  एक पहाड़ है जो सात चोटियों से घिरा है
  • और बहुत प्रभावशाली दिखता है।
  • उस पर्वत को सप्त श्रृंग (सात शिखर वाला पर्वत) कहा जाता है,
  • जहाँ पांडवों ने योगाभ्यास किया था।
  • वहाँ मैं परम शक्ति (महाकाल कालका ) के  गहरे ध्यान में लीन था।
  • इस तरह से मई तपस्या कर रहा था के प्रभु और मै एक ही रूप  हो गए ।
  • मेरे माता-पिता ने भी असंगत प्रभु के साथ संघ के लिए ध्यान किया और संघ के लिए कई प्रकार के विषयों का प्रदर्शन किया। 
  • जिस सेवा से उन्होंने अविभाज्य भगवान का प्रतिपादन किया, वह सर्वोच्च गुरु (अर्थात भगवान) का आनंद था।
  • जब प्रभु ने मुझे आदेश दिया, मैं इस कलयुग में पैदा हुआ था।
  • मुझे यहां आने की कोई इच्छा नहीं थी, क्योंकि मैं प्रभु के पवित्र चरणों की भक्ति में पूरी तरह लीन था।
  • लेकिन प्रभु ने मुझे अपनी इच्छा को समझाया और मुझे इस दुनिया में भेजा।
श्री हेमकुंट साहिब (Shri Hemkunt sahib)
श्री हेमकुंट / हेमकुंड साहिब (Shri Hemkunt sahib)

बाद में 20 वीं शताब्दी में, गुरु जी की आत्मकथा की  जानकारी के आधार पर, सिख इस स्थान का पता लगाने में सक्षम रहे। फिर 1930 के दशक के आसपास, उन्होने एक छोटा गुरुद्वारा बनाया और गुरु ग्रन्थ साहिब की पूजा शुरू की । फिर दुनिया भर के सिख यहाँ आने लगे और यह स्थान सिखों के लिए एक प्रसिद्ध तीर्थ बन गया।

चूंकि यह जगह अधिक ऊंचाई पर स्थित है और सर्दियों के दौरान बड़ी मात्रा में बर्फबारी होती है। तो मौसम की परिस्थियाँ का  सामना करने के लिए एक मज़बूत संरचना की आवश्यकता थी। तो 1960 में भारतीय सेना के सहयोग से वर्तमान गुरुद्वारा साहिब का निर्माण किया गया था।

और जानकारी के लिए इसे भी पढ़े।

गुरुद्वारा हेमकुंट मैनेजमेंट ट्रस्ट

 सिखों को जब श्री हेमकुंट /हेमकुंड साहिब को  इस स्थान के बारे में पता चला तब दुनिया भर से सिख तीर्थयात्री आने लगे । इस तीर्थ यात्रा का प्रबंध करने के लिए किसी संगठन की आवश्यकता थी, इसलिए वर्ष 1960 में, एक सात सदस्यीय ट्रस्ट का नाम स्थापित किया गया था – “गुरुद्वारा हेमकुंट मैनेजमेंट ट्रस्ट”। यह ट्रस्ट हरिद्वार से श्री हेमकुंट साहिब तक के मार्ग के साथ-साथ सात गुरुद्वारों से जुड़ी हुई विभिन्न जिम्मेदारियाँ लेता है। इस ट्रस्ट की देख रेख में गुरद्वारा हरिद्वार, ऋषिकेश, श्रीनगर, जोशीमठ, गोबिंद घाट, गोबिंद धाम (घांघरिया) और गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब हैं।

श्री हेमकुंट साहिब (Shri  Hemkunt sahib)
श्री हेमकुंट साहिब (Shri Hemkunt sahib)

दिल्ली से श्री हेमकुंड साहिब यात्रा (Shri Hemkund sahib yatra from Delhi)

उच्च ऊंचाई और दुरी के कारण, इस  स्थान पर वर्ष में केवल साढ़े चार महीने (जून से मध्य-अक्टूबर) तक ही पहुँचा जा सकता है।

दिल्ली से श्री हेमकुंड साहिब पहुँचने के लिए सड़क यात्रा और पैदल यात्रा दोनों ही करनी परती है। नीचे दिए गए विवरण का पालन करके कोई भी इस स्थान पर जा सकता है।

श्री हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी छोटी यात्रा कार्यक्रम ( Shri Hemkund Sahib and Valley of flowers short itinerary)

  • दिन – 1 :  हरिद्वार या ऋषिकेश पहुंचे – सड़क मार्ग से (250 किमी) पैदल (0 किमी)
  • दिन – 2 : गोबिंद घाट पहुँचे – सड़क मार्ग से (275 किमी) पैदल (0 किमी)
  • दिन – 3 : घांघरिया पहुंचें – सड़क मार्ग से (4 किमी) पैदल (11 किमी)
  • दिन – 4 :  श्री हेमकुंड साहिब जाए और वापस घांघरिया पहुंचे – सड़क मार्ग से (0 किमी) पैदल (11 किमी)
  • दिन – 5 : फूलों की घाटी जाए और वापस घांघरिया पहुंचे – सड़क मार्ग से (0 किमी) पैदल (11- 12 किमी)
  • दिन – 6 : गोबिंद घाट पर वापसी – (4 किमी) पैदल (11 किमी)
  • दिन – 7 : वापसी हरिद्वार / ऋषिकेश -। (275 किमी) पैदल (0 किमी)
  • दिन – 8 : दिल्ली वापसी – सड़क मार्ग से (250 किमी) पैदल (0 किमी)

श्री हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी विस्तृत यात्रा कार्यक्रम ( Shri Hemkund Sahib and Valley of flowers detailed itinerary)

दिन -1:  हरिद्वार या ऋषिकेश पहुंचे।

दिल्ली और हरिद्वार के बीच की दूरी लगभग 230 किलोमीटर है और इसमें लगभग 5-6 घंटे लगते हैं

हरिद्वार से सड़क या ट्रेन द्वारा पहुँचा जा सकता है। हरिद्वार में आप गुरुद्वारे रुक सकते हो जो रेलवे स्टेशन के पास है। शाम को गंगा आरती देखने के लिए हर-की-पौड़ी जा सकते हैं।

अगर आपने  ऋषिकेश जाने की योजना बनाई हैं तो दिल्ली से ऋषिकेश की दूरी लगभग 250 किलोमीटर है और आप लगभग 6-7 घाटों में पहुंच सकोगे। आप ऋषिकेश में गुरुद्वारे में रुक सकते हैं जो ऋषिकेश बस स्टैंड के पास है। ऋषिकेश भी रेल  मार्ग से जुड़ा हुआ है लेकिन सेवा सीमित है। शाम को गंगा किनारे जा सकते हैं और गंगा आरती देख सकते हैं।

यदि आप अपनी गाड़ी से यात्रा नहीं कर रही है तो बेहतर होगा कि आप शाम में अगली यात्रा के लिए बस बुक कर ले। आप साझा कैब द्वारा भी जा सकते हो।

दिन -2: सुबह जल्दी उठे और गोबिंद घाट पहुँचे ।

अगली यात्रा गंगा नदी के किनारे के साथ साथ चलती है । हिमालय के ऊंचे पहाड़ ऋषिकेश से शुरू होते हैं। ऋषिकेश से गोबिंद घाट के बीच की दूरी लगभग 275 किलोमीटर है और लगभग 10-11 घंटो में रास्ता पूरा होगा । आपको बद्रीनाथ राजमार्ग पर जाने की आवश्यकता है। यात्रा के लगभग 2 बजे के बाद आप देवप्रयाग पहुंचेंगे यहां पर अलकनंदा और बागिरथी नदी का संगम है।

 अगली सड़क अलकनंदा नदी के साथ है। रास्ते में श्रीनगर प्रमुख शहर है। श्रीनगर से लगभग एक घंटे की दूरी पर रुद्रप्रयाग है यहां पर मंदाकिनी और अलकनंदा का संगम है। केदारनाथ का रास्ता यही से कटता है जो मंदाकिनी नदी के किनारे चलता  है, लेकिन आपको अलकनंदा नदी के साथ जाना है । इसके बाद आप कर्णप्रयाग, चमोली और जोशीमठ जैसे शहर मिलेगे । गोबिंद घाट से पहले जोशीमठ अंतिम प्रमुख शहर है। नगर के मध्य में गुरुद्वारे के साथ यात्री  निवास भी है।

अंत में आप गोबिंद घाट पहुंचेंगे। अलकनंदा नदी के तट पर बहुत सुंदर गुरुद्वारा है। आप वहां पर गुरुद्वारा यात्री  निवास में रुक सकते हैं नहीं तो होटलों में भी रुक सकते हैं।

दिन -3: जल्दी शुरू करें और घांघरिया पहुंचें।

गोबिंद घाट पैदल यात्रा  की शुरुआत का  प्रमुख पड़ाव है। अगर आप अपना पूरा सामान आगे नहीं ले जाना चाहते हैं,आप गुरुद्वारे के गठरी घर में जमा करवा सकते हो । आपका सामान सुरक्षित रहेगा।  गोबिंद घाट से आगे  सड़क मार्ग केवल 4 किलोमीटर (पुलना गांव) तक है । लगभग 11 किलोमीटर की पैदल यात्रा है और इसमें लगभग 5-6 घंटे लगते हैं। इस दिन आपको घांघरिया (गोविंद धाम) नामक गाँव में आधार शिविर रहने की आवश्यकता पड़ेगी। यहाँ भी ठहरने के लिए गुरुद्वारा है। इस जगह की ऊंचाई लगभग 3300 मीटर है और रात में तापमान काफी ठंडा रहेगा। सुनिश्चित करें कि आप गर्म कपड़े साथ लेकर आए है। गोबिंद घाट और घांघरिया के बीच भी खच्चर / हेलीकाप्टर सेवा उपलब्ध है।

दिन -4:  श्री हेमकुंड साहिब जाए और वापस घांघरिया पहुंचे।

सुबह जल्दी उठें और अपनी यात्रा के अगले हिस्से को शुरू करें। घांघरिया से, श्री हेमकुंड साहिब के लिए 6 किलोमीटर की खड़ी ट्रेक है। यह हिस्सा हर यात्री  के लिए चुनौतीपूर्ण है। श्री हेमकुंड साहिब के लिए खच्चर सेवा भी उपलब्ध है।

यात्रा  में लगभग 3 घंटे लगेंगे और आप पृथ्वी की सबसे खूबसूरत जगह पर पहुँचेंगे। यहां पर सात चोटियाँ हैं जिन्हें सप्त स्रिंग और एक दिव्य झील है। झील के किनारे गुरुद्वारा स्तिथ है। झील (सरोवर) में स्नान करे और गुरुद्वारे में गुरु ग्रथ साहिब जी का आशीर्वाद ले और कीर्तन आनंद माने।

बाद में आप आसपास की प्रकृति को निहारने में कुछ समय बिता सकते हैं। अगर आप मानसून के दौरान गए हों, तब उत्तराखंड का राज्य पुष्प “ब्रम्ह कमल” देख सकोगे। झील के किनारे लक्ष्मण मंदिर भी है। वहाँ कुछ पल बिताने के बाद में आप घांघरिया वापस आ सकते हैं और रात के लिए वहां रुक सकते हैं।

दिन – 5 : फूलों की घाटी जाए और वापस घांघरिया पहुंचे

फूलों की घाटी घांघरिया से कुछ ही दूरी पर है। ट्रेक के 1 किमी के बाद एक प्रवेश द्वार है जो केवल सुबह 7 बजे खुलता है। घाटी उस स्थान से लगभग 5-6 किमी दूर है। एक और 1 किमी के बाद एक खड़ी चढ़ाई होती है जो 1 किमी तक चलती है तो आपको घाटी की एक स्पष्ट तस्वीर दिखाई देगी। घाटी में तरह-तरह के फूल हैं और इसे देखकर आपको खुशी होगी।
घाटी लगभग 3-4 किमी विशाल है, आप दिन का पहला आधा भाग वहां बिता सकते हैं और बाद में आप वापस घांघरिया लौट सकते हैं।

दिन -6 : गोबिंद घाट पर वापसी।

सुबह जल्दी निकल कर आप दोपहर में गोबिंद घाट पहुंच सकते है।
अगर आपके पास समय है तो आप बद्रीनाथ भी जा सकते है तो केवल 25 किलोमीटर दूर है।

दिन -6: वापसी हरिद्वार / ऋषिकेश।

दिन -7: दिल्ली वापसी।

 यदि फूलों की घाटी की यात्रा नहीं करना चाहते हैं तो एक दिन कम हो जाएगा।

श्री हेमकुंड साहिब यात्रा कब करें (when to do Shri Hemkund sahib yatra)

जैसा कि श्री हेमकुंड साहिब साल में केवल 4.5 महीने (25 मई या 1 जून से 10 अक्टूबर तक) खुला रहता है।

जुलाई से अगस्त तक मानसून होते हैं, उस अवधि के दौरान भूमि के खिसकने के कारण सड़क के अवरुद्ध होने की उच्च संभावना होती है। जून और सितंबर के दौरान आकाश ज्यादातर स्पष्ट होता है लेकिन गर्मियों की छुट्टियों के दौरान जून में भारी भीड़ होती है। श्री हेमकुंट साहिब की यात्रा के लिए सितंबर का महीना सबसे अच्छा है अगर कम भीड़ होती है। अगर आप प्रकति प्रेमी  हैं और चाहते हैं कि इसके साथ-साथ फूल भी दिखें, तो जुलाई से अगस्त का समय सबसे अच्छा है।

श्री हेमकुंड साहिब यात्रा कौन कर सकता है (who can do Shri Hemkund sahib yatra)

इस जगह पर प्रकृति से प्यार करने वाले लोगों के लिए एक आदर्श स्थान है। यह स्थान केवल सिखों के लिए ही नहीं है, बल्कि सभी के लिए है। कोई भी यात्रा कर सकता है। हिमालय में यह स्थान है और यहाँ आने के लिए पैदल चलना पड़ता है , यह उस व्यक्ति के लिए आसान है जिसके पास अच्छी शारीरिक शक्ति है। इस ऊंचाई पर ऑक्सीजन का स्तर कम होता है इसलिए यदि किसी को सांस से संबंधित समस्या है, तो उसे यहाँ आने से बचना चाहिए। इसके बचो और अलावा बुजुर्ग लोगो को भी यहाँ आने का परहेज करना चाहिए ।

श्री हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान कहां ठहरें (where to stay during Shri Hemkund sahib yatra)

मार्ग में रहने के लिए गुरुद्वारों में कई यात्री  निवास हैं जिन्हें द गुरुद्वारा हेमकुंट मैनेजमेंट ट्रस्ट द्वारा संचलित किया जाता है। ये गुरुद्वारे हरिद्वार, ऋषिकेश, श्रीनगर, जोशीमठ, गोबिंद घाट और गोबिंद धाम (घांघरिया) में हैं।

हरिद्वार से घांघरिया तक बहुत सारे होटल भी  हैं। श्री हेमकुंड साहिब 4160 मीटर ऊँचाई पर स्थित है, इसलिए रात्रि विश्राम का कोई प्रावधान नहीं है। तो उसी दिन घांघरिया वापस आने की जरूरत है या  गोबिंद घाट तक आ सकते हैं।

श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा के दौरान जरूर देखें (Things to see during Shri Hemkunt Sahib Yatra)

ब्रम्हाकमल Bramh Kamal
ब्रम्हाकमल Bramh Kamal
ब्लू पोपी blue poppy
ब्लू पोपी blue poppy
फूलों की घाटी Valley of flowers
  • श्री हेमकुंट साहिब में पवित्र झील में स्नान।
  • ब्रम्हाकमल, हिमालयी फूलों का राजा और उत्तराखंड का राज्य पुष्प – श्री हेमकुंट साहिब के पास अगस्त के महीने में दिखता है।
  • Blue Poppy – ब्लू पोपी, सुंदर हिमालयन फूल – मानसून के दौरान देखा जाता है।
  • फूलों की घाटी, फूलों की कई किस्मों के साथ एक राष्ट्रीय उद्यान।

संक्षेप

मुझे उम्मीद है कि इस ब्लॉग में आपको श्री हेमकुंड साहिब यात्रा (Shri Hemkund sahib yatra) के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी। चलो यह सब संक्षेप में समझे।

  • श्री हेमकुंड साहिब संसार में सबसे ऊंचा गुरुद्वारा है।
  • यह भारत के उत्तराखंड राज्य में सत्य 4160 मीटर की ऊचाई पर स्तिथ है।
  • श्री हेमकुंड साहिब यात्रा (Shri Hemkund sahib yatra) वर्ष में केवल 4.5 महीने खुलती है।
  • श्री हेमकुंड साहिब के रास्ते में ठहरने के लिए कई विकल्प हैं।

मुझे उम्मीद है आपको इस ब्लॉग को पढ़कर यात्रा की योजना बनाने में आसानी होगी । यदि आप कोई सवाल या कोई सुझाव दे रहे हैं तो कृप्या टिप्पणी (comment) करें। अन्य पर्यटन स्थानों के बारे में जानकारी के लिए कृप्या किसी अन्य ब्लॉग पर जाएँ।

यदि आप श्रीखंड महादेव की यात्रा करना चाहते हैं तो इस ब्लॉग को पढ़े।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

प्रश्न 1 : हेमकुंड साहिब कौन से स्टेट में है?

हेमकुंड साहिब चमोली जिला, उत्तराखंड, भारत में  है।

प्रश्न 2 : हेमकुंड साहिब की चढ़ाई कितनी है?

गोविन्द घाट के आगे से से यात्रा शुरू होती है उसी ऊंचाई है 2300 m , और हेमकुंड साहिब की ऊंचाई है 4160 m। हेमकुंड साहिब की चढ़ाई 17 km एक तरफ की है। आना जाना मिलकर 34 km हो जाता है।

प्रश्न 3 : हेमकुंड साहिब यात्रा कैसे करें?

हेमकुंड साहिब यात्रा आप सड़क मार्ग और पैदल मार्ग से कर सकते है। गोविंद घाट से घांघरिया के बीच हेलीकॉप्टर सेवा भी है। सभी ट्रेक रूट पर खचर सर्विस भी उपलब्ध है।

प्रश्न 4 : हेमकुंड का क्या अर्थ होता है?

हेमकुंड का अर्थ होता है बर्फ के / बर्फीला पानी का कुंड।
हेमकुंड एक स्थल है जो की चमोली जिला, उत्तराखंड, भारत में  है।

प्रश्न 5 : हेमकुंड साहिब क्यों प्रसिद्ध है?

श्री हेमकुंड साहिब सिखों के 10वे गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह की जी के पूर्व जन्म तप अस्थान है। गुरुजी ने अपनी आत्मकथा में इस स्थान के बारे बताया है

प्रश्न 6 : हेमकुंड की खोज कब हुई?

हेमकुंड साहिब की खोज सन् 1934 में संत सोहन सिंह जी ने की थी।

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