रक्षाबंधन पर निबंध (Essay on Raksha Bandhan in Hindi )

रक्षाबंधन पर निबंध ( Essay on Raksha Bandhan in Hindi )

त्यौहार किसी भी देश की विशेषता, संस्कृति व सभ्यता को दर्शाते हैं | जैसा की हम सभी जानते हैं भारत त्यौहारों का देश है और भारत में पर्वों व त्यौहारों को धूम -धाम और हर्ष -उल्हास से मनाया जाता है | कोई भी त्यौहार हो ,हरेक  इंसान को इसे अपने ढंग  से  मनाने की आज़ादी है | बाकि त्यौहारों की तरह रक्षाबंधन को भी देश के कई हिसों में मनाया जाता है | रक्षाबंधन का त्यौहार भाई -बहन के रिश्ते का प्रतीक है | अगर आप रक्षाबंधन पर निबंध ( Essay on Raksha Bandhan in Hindi ) लिखना चाहते है तो इस ब्लॉग पोस्ट को पढ़े। 

प्रस्तावना ( Introduction  )

यह यह भाई -बहन के रिश्ते का पवित्र पर्व है जो कि मुख्यतः  हिन्दुओं में प्रचलित है | रक्षाबंधन ( protection band ) शब्द का अर्थ है  -एक सूत्र जो की वचन से बंधा है या सूत्र बांधने की क्रिया व भाव | इस मौके ( अवसर ) पर बहने  भाइयों की कलाई पर धागा ( राखी ) बांधती  है जिसके साथ एक वचन (वादा )होता है कि  उनके भाई हर हाल में तथा  उम्र भर  उनकी रक्षा करेंगे | 

रक्षाबंधन का ऐतिहासिक तथा पौराणिक तथ्य  (Historical and mythological facts of Raksha bandhan )

रक्षाबंधन पर्व की शुरुआत कब और कैसे हुई  यह सब तो कोई नहीं जानता परन्तु पुराणों में रक्षाबंधन का वर्णन कई बार हुआ है | जैसे हम सभी ने सुना है की देवों -दानवों का  आपस में कई बार युद्ध हो चुका  है | एक  बार युद्ध के दौरान जब दानव , देवों पर हावी हो गए थे तब इंद्र देव गबरा गए। यह सब  देखकर उनकी पत्नी भी काफी चिंतित  हो गई| तब नारद मुनि जी के सुझाव पर  वो विष्णु जी के पास सहायता मांगने गई | परन्तु विष्णु जी भी किसी  वचन से बंधे होने के कारण  उनकी मदद करने  के लिए सक्षम नहीं थे तब इंद्र देव की  पत्नी ने उन्हें रक्षासूत्र (धागा) बांध कर अपना भाई बनाया और उसके बदले में विष्णु जी ने उनकी सहायता की | गौरवतलव है की उस दिन  श्रावण (सावन) महीने की पूर्णिमा ही थी | 

महाभारत का समय

महाभारत में भी रक्षाबंधन के बारे में उल्लेख किया  गया है | जिसके अनुसार जब  शिशुपाल का वध करते समय श्री कृष्ण जी  की ऊँगली पर चोट (घाव) लग गई थी तब द्रोपदी  अपनी साड़ी के पल्लू से कपड़ा  फाड़कर कृष्ण जी की ऊँगली पर बांध दिया था | जिसके फलस्वरूप  श्री कृष्ण जी ने चीरहरण के समय उनकी साड़ी का कपड़ा  बढ़ाकर द्रोपदी की  मदद कर  उनकी  लाज रखी और एक भाई होने का कर्तव्य पूरा किया। 

राजपूत राजाओं के समय

ऐसा भी माना जाता है  राजा -महाराजा लोग (राजपूत) जब कभी युद्ध के लिए जाते थे तब उनकी रानियां उन्हें एक रक्षा कवच बांध देती थीं। उन्हें यह विश्वास  होता था की यह कवच उनकी रक्षा करेगा। रक्षाबंधन एक विश्वास का ही प्रतीक है जिसमें बहनें अपने भाई की कलाई पर सूत्र बांधकर उनकी लम्बी उम्र की कामना करतीं हैं।  

पौराणिक  तथ्यों  के साथ – साथ कुछ एतिहासिक कहानियों में भी रक्षाबंधन का वर्णन किया गया है , जैसे जब मेवाड़ की रानी कर्मावती को जब सूत्रों से पता चला की उनके राज्य पर हमला होने वाला है  तब उन्होने हुमायूँ को शत्रु होने के बाद भी राखी भेजी थी और मदद की गुहार लगाई  |  हुमायूँ ने भी मुस्लिम होते हुए भी उनकी  भावना को समझा और उनके राज्य की रक्षा की | यह अलग बात है की वह मदद समय पर नहीं कर पाए और रानी को बचा नहीं पाए परन्तुं फिर भी उन्होंने उनकी मृत्यु का बदला लेकर उनके राज्य पाठ को बचाकर, उसका कार्यभार  के उसके असली हकदार को सौंप दिया था और अपने भाई होने का फ़र्ज पूरा किया।

एक अन्य प्रसंग (कहानी  ) के अनुसार सिकंदर की पत्नी  ने भी अपने शत्रु पुरूवास ( पोरस ) को राखी भेजी थी और उपहार के रूप में अपने पति के  प्राणों  ( प्राणदान )को  माँगा था | इस वचन को पुरूवास ने भी  उनके पति की जान को युद्ध के दौरान हुई हार के बाद बख्श(प्राणदान ) कर पूरा किया  |            

सामाजिक व् साहित्यिक तथ्य (Social and literary facts)

सामाजिक   व् साहित्यिक  पहलुओं  से अगर देखा जाये तो त्यौहार या पर्व सामाजिक  , पारिवारिक  ,सांस्कृतिक और साहित्यिक  सभ्यता को दर्शाते हैं | यह अवसर आपसी प्रेम-प्यार  ,त्याग , सहनशीलता और आत्मीयता को भी ब्यान करतें  हैं | और वैसे भी रक्षाबंधन को भाई -बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक  माना गया है | जैसा कि  हम जानते  की लड़कियां (बहनें ) शादी के बाद अपने -अपने सुसराल चली  जाती हैं, तब इन्हीं अवसरों पर वह अपने मायके आती हैं और अपने भाई को राखी बांधती हैं जिससे आपसी प्रेम-प्यार  बना रहता है |

 रक्षाबंधन को सम्मान देतें  हुए ,इस विषय  पर कई नाटक और फिल्में भी  बनाई  गई हैं जो की भाई बहन के प्यार को दर्शाते हैं। यह बंधन एक दिन का नहीं बल्कि सम्पूर्ण जीवन का बंधन है क्योंकि भाई -बहन उम्र भर एक दूसरे से प्यार करतें रहतें हैं और हर मुसीबत के समय उनके साथ खड़े रहतें हैं। 

रक्षाबंधन का त्यौहार कब मनाया जाता है ( When We Celebrate Raksha Bandhan)

यह एक हिन्दु त्यौहार है , जो प्रतिवर्ष  श्रावण (सावन) महीने या मास ( जुलाई -अगस्त ) की पूर्णिमा के दिन ही मनाया जाता है | इस दिन बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी (धागा ) बांधती हैं और उनकी लम्बी उम्र तथा अच्छे  स्वास्थ तथा तरक्की  की कामना करतीं हैं |  दूसरी तरफ़  भाई भी अपनी बहनों  की रक्षा का वचन देते हैं और उन्हें उपहार भेंट करतें हैं। 

रक्षाबंधन का त्यौहार क्यों/कैसे   मनाया जाता है (Why/How We Celebrate Raksha Bandhan )

रक्षाबंधन  का त्यौहार  बहनों की साल भर की प्रतिक्षा और उनका अपने भाईयों के प्रति प्रेम  की भावना को दर्शाता  है |  रक्षाबंधन के दिन राखी(धागा) बांधने की पुरानी  रीत है  | इसे पुरे भारत में बड़ी ही धूम -धाम से मनाया  जाता है | इस की तैयारियाँ बहुत समय पहले  से  ही शुरू हो जाती है | बहनें अपने  भाई के लिए रंग – बिरंगी और खूबसूरत  राखियां  खरीदतीं हैं और इस उनके  भाई भी उनके लिए उपहार खरीदतें हैं |  यह त्यौहार खुशी और उत्साह से भरा होता है | बचपन से ही भाई- बहन एक दूसरे के साथ खेल – कूद और लड़ -झगड़कर बड़े होते हैं | यह रिश्ता ही ऐसा है की इसकी तुलना हम किसी भी और रिश्ते नहीं कर सकते ,यह अतुलनीय है | बचपन से ही भाई- बहन आपस में चाहे जितनी भी लड़ाई कर लें परन्तुं अगर उन्हें कोई और मारे या परेशांन  करे तो वह  बर्दाश नहीं कर पाते , चाहें डांटने वाले उनके माता पिता ही क्यों न  हों | जैसे -जैसे वह बड़े होतें हैं उनका रिश्ता और भी गहरा हो जाता है वह अपनी निजी बातें भी एक दूसरे  से बाँटते हैं जो वह अपने माता पिता से डर के मारे नहीं कह  पाते हैं | बड़े भाई- बहन  अपने छोटों का ध्यान भी रखतें हैं और समय -समय पर उनका मार्गदर्शन भी करतें हैं | 

वैसे तो  भाई  – बहन का रिश्ता ही बहुत खास होता है वह किसी विशेष दिन का मोहताज़  नहीं है , पर दुनिया की रीत है इस पर्व को मनाने की तो हम इसे रक्षाबंधन के रूप में मनाते  हैं | ये दिन उनके आपसी प्रेम , एकजुटता ,कर्तव्य व विश्वास का प्रतीक है | रक्षाबंधन  का पर्व, एक वादा है उन सभी भाइयों का अपनी बहनों से की वह हर मुसीबत की घड़ी  में उनके साथ हैं  और उन बहनों का भाई के ऊपर विश्वास का , यह एक मज़बूत बंधन है | रक्षाबंधन  के दिन को भाई  – बहन  के प्रति प्रेम-प्यार व कर्तव्य की भावना और शुभकामनायों के साथ मनाया जाता  है | इस दिन सभी बहनें अपने भाईयों  की लंबी उम्र और तरक्की की कामना करते हुए उन्हें  राखी बांधती हैं | 

यह जरूरी नहीं कि जिसे वह  राखी बांध रही हैं वो उनका सगा  भाई ही हो ,राखी बांध कर उन्हें अपने मुंहबोले भाई भी बना लेतीं हैं | मुंहबोले भाई कई बार  अपना कर्तव्य सगे भाइयों से ज्यादा निभातें हैं | और ऐसा भी देखा गया है की जिन घरों  में लड़के नहीं होतें हैं , उन घरोँ में उनकी बड़ी बहनें या मुंहबोले भाई ही घर की ज़िम्मेदारिआं उठाते हैं।  

रक्षाबंधन और आधुनिकता (Raksha Bandhan and modernity)

आजकल आधुनिकता का दौर है , इस समय  राखी के लिए तरह -तरह के उपहार ऑनलाइन मिल जातें हैं। राखी के ग्रीटिंग कॉर्ड भी बाज़ार में उपलब्ध है। हर इंसान अपने -अपने तरिके से इस पर्व को मनाता है। अभी यह भी पाया गया है की जैसे बहनें अपने भाइयों के लिए राखियाँ खरीदतीं हैं बैसे ही अपनी भाभियों के लिए भी, तांकि आपसी प्यार बना रहे और वह भी खुश रहें। वैसे भी माँ -बाप के बाद भाई -भाभियाँ ही घर को संभालतीं हैं इस लिए उनके लिए ही यह रीत शुरू की गई है। 

 रक्षाबंधन की तैयारियाँ (Raksha Bandhan preparations)

 बाकि त्यौहारों की तरह रक्षाबंधन की तैयारियाँ भी काफी समय पहले से ही शुरू हो जाती हैं। ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि सारे भाई अपनी बहनों के पास नहीं रहते ,वह  दूसरे ज़िले , प्रदेश या किसी और देश में रहतें हो सकते  हैं। और बहनें भी अपने भाइयों को राखी बांधने घर  नहीं जा पाती इसलिए वह  रक्षाबंधन आने से पहले ही उनको राखी डाक के द्वारा भेज देती हैं ताकि,राखी  के दिन उनके भाई अपनी कलाई पर उनके द्वारा भेजी हुई राखी बांध  पाएं। बहनें रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके पूजा की थाली सजातीं हैं। भाई तैयार होने के बाद अपनी बहनों से टीका लगवाते हैं और बहनें उनकी आरती  उतारतीं  हैं | आरती के बाद बहनें उनकी दाहिनी कलाई पर राखी बांधती हैं। भाई अपनी बहनों को उपहार या धन भेंट करता है। इस सारे कार्यक्रम के बाद ही भोजन किया जाता है। 

 रक्षाबंधन  के आगमन से पहले से ही दुकानों व  बाज़ारों  में चहल -पहल शुरू हो जाती है। रंग -बिरंगी राखियाँ भी दुकानों की शोभा बढ़ातीं हैं। छोटे बच्चों को भी राखी का त्यौहार बड़ा अच्छा लगता है क्योंकि उस दिन उनको नई -नई राखियाँ पहनने को मिलतीं हैं। आजकल वैसे भी राखियाँ बहुत खूबसूरत आ रही हैं। बच्चों के लिए फूल ,कार्टून ,घड़ी वाली व म्यूजिकल राखियाँ भी देखने को मिलतीं हैं और बच्चें इन सब को देखकर बहुत खुश होतें हैं। रक्षाबंधन के दिनों में हलवाइयों की दुकानों पर भी काफी भीड़ लगी रहती है। मंदिरों में भी सावन पूर्णिमा की विशेष पूजा होती है।  कई तीर्थ- स्थलों पर श्रावणी का मेला भी लगता है। कई लोग इसदिन को काफी पवित्र  मानते   हैं तथा इस दिन दान पुण्य का काम करतें हैं। कुछ लोग घर पर पूजा पाठ भी करातें हैं |

रक्षाबंधन पर सरकारी सुविधा (Government facilities on Raksha Bandhan)

जैसे की हम सब जानतें हैं की सारी  बहनें अपने भाइयों को राखी बांधने घर नहीं जा पाती इसलिए उन्हें डाक का सहारा लेना पड़ता है। भारत सरकार  द्वारा डाक विभाग की मदद से राखी  भेजने का विशेष प्रावधान किया गया है। इस अवसर पर ५ रूपए के सुन्दर लिफ़ाफे डाकघर से मिल जातें हैं और राखी के वजन के आधार पर ही उसकी टिकट लगती है। कई बार लिफ़ाफे बारिश की वजह से भीगकर  खराब हो  जाया करते  थे इसलिए डाक विभाग ने वाटरप्रूफ लिफाफे भी उपलभ्द करवाएं हैं। सरकार द्वारा बहनों/ महलायों को राखी वाले दिन निशुल्क यात्रा का भी प्रावधान है। जिसके चलते वह बिना खर्च लिए अपने भाई  को राखी बांधकर आ सकतीं हैं। 

रक्षाबंधन को स्कूलों व कॉलजों में प्रतियोगिताओं के रूप में मनाया जाता है। इस दिन बच्चे अलग -अलग तरह की राखियां बनातें हैं और प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं। राजनैतिक दलों के लोग भी इस दिन को बच्चों के साथ राखी बांधकर मनाते हैं। हमारे प्रधानमंत्री जी भी इस दिन बच्चों से राखी बंधवाते हैं। फौजी भाई भी हमारे देश की रक्षा करतें हैं इसको मद्देनज़र रखकर रक्षाबंधन के दिन फौजी भाइयों को भी राखी बंधी जाती है जिससे उनका मनोवल बढ़ता है और उन्हें खुशी मिलती है। उन्हें यह जानकार अति प्रसन्ता होती है कि  देशवासी भी उनसे उतना ही प्यार करते हैं जितना की वहउनसे।  यह त्यौहार आपसी मेल-मिलाप तथा प्यार का प्रतीक है। 

 उपसंहार (Epilogue)

 रक्षाबंधन का त्यौहार हमारी संस्कृति का प्रतीक है और हमें इस बात पर गर्व है। यह भाई बहन के रिश्ते को बयान करता है। लोग एक तरफ इस पर्व को  मनाते हैं और दूसरी ओर कन्याभ्रूण हत्या भी कर रहें हैं, जो की घोर अपराध है। अगर बहनें ही नहीं होंगी  तो कलाइयों पर राखी कौन  बांधेगा ? और भाइयों की कलाइयाँ इस दिन सुनी की सूनी ही रह जाएँगी।  आजकल इस रिश्ते की पवित्रता समाप्त  हो रही है कुछ बहनें भी अपने भाइयों से इसदिन जरूरत से ज़्यादा की मांग रखतीं हैं जो  सही नहीं है। हमें रिश्ते की एहमियत को समझना होगा न की उपहारों की। कई बार यह भी देखा गया है की ससुराल वाले लड़कियों को तंग -परेशान करते  हैं , उन्हें या तो मायके जाने नहीं देते या दाज -दहेज़ की मांग करते रहतें हैं ,जो की बहुत गलत है हमें ऐसी प्रथाओं को बंद करना चाहिए। 

हमें हर दिन व हर त्यौहार ख़ुशी तथा प्यार से मनाना चाहिए। रक्षाबंधन पर और जानने के लिए यह भी पढ़े। 

सारांश (Summary ) रक्षाबंधन पर निबंध ( Essay on Raksha Bandhan in Hindi )

हम यह आशा करते है की इस पोस्ट रक्षाबंधन पर निबंध ( Essay on Raksha Bandhan in Hindi ) में आपको रक्षाबंधन के बारे में अच्छी जानकारी मिली होगी । चलो हम अब इसका सार जानने का प्रयास करते है।

  • रक्षाबंधन भारत का एक प्रमुख त्यौहार।
  • यह बाई बहन के रिश्ते को और पक्का बनता है।
  • यह सो बरसो यह भारत वर्ष में मनाया जा रहा है।
  • अगस्त के महीने में पूर्णिमा के दिन यह त्यौहार आता है।
  • इस त्यौहार में बहन अपने बाई की कलाई पर राखी बांधती है और बाई उसकी रक्षा का बचन देता है

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