दीपावली पर निबंध – Diwali Essay in Hindi दीपावली पर निबंध – Diwali Essay in Hindi

दीपावली पर निबंध – Diwali Essay in Hindi

भारत देश को अनेक त्यौहारों का देश कहा जाता है | यहाँ पर हर महीने कोई न कोई त्यौहार जरूर ही आता है जो कि हमारी संस्कृति, सभ्यता एवं एकजुटता को दर्शता हैं | पर्व / त्यौहार देश का गौराव होते हैं | सम्पूर्ण भारत में सभी लोग अपने – अपने त्यौहारो को बड़ी ही धूम -धाम से मनाते हैं | पर्व जीवन में नई चेतना, उमंग, और स्फूर्ति प्रदान करते हैं | त्यौहारों के माध्यम से हम प्रसन्ता तथा आनंद प्राप्त करते हैं | त्यौहारों के अवसरों पर हमें लोगों के करीब आने का मौक़ा मिलता है, हम अपनी खुशियों को सांझा करते  हैं | दीवाली सबसे महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक है, जिसका इंतजार न सिर्फ बच्चे बल्कि बड़े लोगों को भी रहता है | यह ब्लॉग दीपावली पर निबंध है | – (Diwali Essay in Hindi)

उत्तर भारत में दीपावली को सबसे प्रमुख त्यौहार के रूप में मनाया जाता हैं, क्योकि इस त्यौहार को न सिर्फ़ हिन्दू मनाते हैं बल्कि इसे सिख, जैन, आर्य और कई धर्म के लोग भी अपनी परंपरा के हिसाब से मनाते हैं | दीपावली को हर्ष और सुख-समृद्धि का त्यौहार भी कहा जाता है | दीपवाली को सिख धर्म के लोग बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाते हैं ।

दीपावली का मतलब

 दीपावली शब्द दो अक्षरों के मेल से बना है दीप’ और आवली’ जिसका अर्थ है दीपों का समूह | दीपावली का त्यौहार अंधकार में रोशनी का प्रतीक भी माना जाता है | इसे रोशनी का त्यौहार भी कहा जाता है | इस दिन हिन्दू और सिख भाई अपने घरों और धार्मिक स्थलों पर दीपमाला करते हैं और भगवान की पूजा करतें हैं | अमावस्या की काली रात में भी यह अपनी रोशनी से पूरे भारत वर्ष हो ही नहीं बाकी देशों में भी अपनी चमक विखेरता है, तभी तो सभी कहते हैं “असत्य पर सत्य की जीत” |

दीपावली क्यों मनाई जाती है

दीपावली पर निबंध – Diwali Essay in Hindi

इस दिन भगवान श्री राम चंद्र जी रावण का वध करके, 14 वर्ष का वनवास काटकर माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ अपनी जन्मभूमि अयोध्या वापिस आये थे और उनके आगमन की ख़ुशी में अयोध्यावासियों ने अपने घर में देसी घी के दीपक जलाये थे | अब यह परम्परा बन चुकी है तथा हर साल इसे धूमधाम से मनाया जा रहा है |

दीपावली का गौरवमय ऐतिहासिक महत्व

ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इसी दिन जैन धर्म के 24वें तीर्थकर स्वामी महावीर को मोक्ष प्राप्त हुआ था | जैन धर्म के स्वामी महावीर और आर्य समाज के प्रतिष्ठापक स्वामी दयानन्द और प्रसिद्ध ब्रह्यज्ञानी स्वामी रामतीर्थ जैसे महापुरुषों को मोक्ष की प्राप्ति इसी दिन ही हुई थी | ऐसा भी माना जाता है, की दिन ही जब समुंदर मंथन हो रहा था तब उसमें से माता लक्ष्मी का जन्म हुआ था।

दीपावली मनाने की तैयारियां

दीपावली दशहरे के 20/21 दिन बाद आती है | जिसके कारण लोग अपने घरों को दशहरे के दिनों से ही सजाना शुरू कर देते हैं | इस दिन लोग अपने घरों की साफ़ सफाई करते हैं | लोग अपनी ख़ुशी को दूसरों से साँझा करने के लिये  मिठाईयां भी बाँटते हैं | लोग दीपावली पर्व को इतना शुद्ध मानते हैं और इसकी तैयारिओं के लिये घर के लिए कोई न कोई विशेष वस्तु जरूर खरीदते हैं | कुछ लोग दीपावली के अवसर के लिए नए नए कपड़े भी सिलवाते हैं और पटाखे, आतिशबाजियां, मोमबत्तियां, दीपक आदि की खरीदारी भी पहले से शुरू कर देते हैं | दीपावली के दिन लोग अपने घरों में मोमबत्तियां, घी के दीपक, बिजली की रोशनी, रंगोली आदि  की मदद से पूरे घर को जगमगा देते हैं |

दीपावली पर निबंध – Diwali Essay in Hindi

दीपावली के दिन सुबह उठकर नहा – धोकर नए कपड़े पहनते हैं | दिन में सगे- सम्बन्धियों और मित्रों से मिलकर उन्हें उपहार भेंट करते हैं | शाम को घर पर खूबसूरत रंगोली बनाते हैं | रात को घर पर मोमबत्तियां, दीपक आदि से सजाकर लक्ष्मी माता की पूजा करते हैं और अच्छे -अच्छे पकवान भी बनाये जाते हैं | लोगों द्वारा रात को आतिशबाजियां, व पटाखें भी चलाये जाते हैं |

दीपावली पर निबंध – Diwali Essay in Hindi

दीपावली कब मनाई जाती है

दीपावली का त्यौहार हमेशा हिंदू कैलेंडर के अनुसार दशहरे के 20/21 दिन बाद में कार्तिक महिने (अक्टूबर/नवंबर) की अमावस्या के दिन आता है । हिन्दू रीति – रिवाज़ों के अनुसार हिन्दू लोग दीपावली को पांच दिनों तक मनाते हैं, जैसे – धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा, और भाई दूज |

शुरुआत धनतेरस से करते हैं जिसमें लोग अपने लिए कोई न कोई सोना – चांदी के आभूषण खरीदते या फिर घर के लिए कुछ नया ले आते हैं | इसकी मान्यता है की जो भी इस दिन खरीदारी करेगा उसके घर में बरकत बनी रहेगी | कुछ लोग इस दिन चाँदी का एक सिक्का खरीदते हैं | दूसरा दिन नरक चतुर्दशी के दिन भगवान कृष्ण ने दानव नरकासुर को मारा था | भगवान कृष्ण की याद में इस दिन को छोटी दीपावली के रूप से मनाते हैं | तीसरे दिन दीपावली त्यौहार का मुख्य दिन होता है जिसमे माता लक्ष्मी जी की पूजा होती  है |

धनतेरस में ख़रीदा हुआ सोने का सिक्का माता लक्ष्मी के सामने रखकर लोग माता की पूजा करते हैं | दीपावली को बड़ी दिवाली का नाम भी दिया गया है | चौथे दिन आती है गोवर्धन पूजा | इस दिन इंद्र ने क्रोधित होकर बहुत तेज़ वारिश की थी भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर लोगो की मदद की थी | इस परम्परा को महिलाएं गोबर घर के बाहर रखकर पूजा करती हैं | अंतिम दिन भाई – दूज का मनाते हैं जिसमें लड़किया अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर मिठाई खिलाती हैं | यह त्यौहार रक्षाबंधन के जैसे ही मनाया जाता है |

दीपावली के त्यौहार आने से पहले वर्षा ऋतु समाप्त हो जाती है और शरद ऋतु शुरू होने लगती है | दीपावली के दिनों में हल्की सी ठंड होती है और मौसम सुहाबना होता है | यह त्यौहार ना सिर्फ हमारे देश में बल्कि बाकी कई देशों में भी मनाया जाता है |

सिख और दीपावली

यह उस समय की बात है जब मुगल हकूमत भारत में अपने गलत इरादों से लोगों को तंग कर रही थी | जो भी उनके खिलाफ़ बोलता था उसको जेल में ढाल देती थी | इसके चलते उसने भारत के 52 हिन्दू राजाओं जो मुगल हकूमत के विरुद्ध बोलते थे उनको जेल में ढाल दिया था | सिख धर्म के पांचवें गुरु जी की शहादत के बाद गुरु हरगोबिंद साहिब जी छठे गुरु बने | गुरु जी ने मीरी – पीरी का सिंद्धांत बनाया जिसमें उन्होंने 2 तलवारे रखी और श्री अकाल तख्त साहिब की सिर्जना  की | जो भी मुगल हकूमत से परेशान होता था वह गुरु जी के आगे अपनी फ़रियाद रखता था | जब  मुगल हकूमत को इसके बारे में पता चला तो उन्होंने गुरु जी को भी ग्वालियर के किले में बंदी बना लिया ।

गुरू जी जेल में रह कर भी प्रभु के नाम का सिमरन करते थे | लगभग वह वहाँ पर 2 साल तक रहे |कुछ दिन बीतने के बाद जहांगीर बीमार पड़ गया और उसने अपना कई हकीमो से इलाज भी करवाया परन्तु उसको कोई फर्क ना पड़ा | आखिरकार वह साईं मिया मीर जी की शरण में आया जिन्होने दरबार साहिब अमृतसर के सरोवर का नींव पत्थर रखा था । साईं मिया मीर जी ने कहा की तुमने बहुत बड़ा पाप किया है कि तुमने रब्ब के रूप को कैद करके रखा है जिस कारण तुम्हारी यह दशा हुई है | साईं मिया मीर जी के कहने पर उसने गुरु जी को जेल से रिहा करने का निर्णय लिया।

गुरु जी की रिहाई की खबर जब सभी राजाओ को पता चली तो वह बहुत चिंतिंत हो गये, क्योंकि उनको पता था की गुरु जी ही उनकी फ़रियाद सुनते हैं अगर वह यहाँ से चले जायेगे तो उनको यहाँ से निकालने वाला कोई भी नहीं होगा | गुरु जी ने सभी राजाओ से तनाव/चिंता ना लेने को कहा और सभी राजाओ को अपने साथ जेल से रिहा होने का वचन दिया | गुरु जी ने अकेले रिहाई के लिये मना कर दिया | इस बात का जब जहांगीर को पता चला तब वह बहुत चिंतिंत हो गया, वह बाकी राजाओ को छोड़ना नहीं चाहता था | फिर उसने कहा जो भी राजा गुरु जी का दामन पकड़कर क़िले से बाहर निकल पायेगा उसे बाहर जाने दिया जायेगा |

राजाओ को छुड़वाने के लिये गुरु जी ने अपने लिए एक विशेष तौर का 52 कलियों वाला चोला तयार करवाया जिसकी एक-एक कली को पकड़कर सभी राजे कैद से बाहर आ गए। ऐसे करके गुरु जी ने अपने साथ 52 राजाओ को भी रिहा करवा लिया | इस कारण गुरु जी को बंदी छोड़ के दाते भी कहा जाता है।

बंदी छोड़ दिवस

गुरु हरगोबिन्द जी रिहाई के उपरांत अमृतसर पहुंचे थे तव उनकी रिहाई की ख़ुशी में नगर वासियों ने दिपक जलाये थे | उसी दिन से आज तक अमृतसर में यह त्यौहार ‘बंदी छोड़ दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। “बंदी” शब्द का अर्थ है “कैद”, “छोड़” का अर्थ है “रिहाई” और “दिवस” का अर्थ है “दिन” | “बंदी छोड़ दिवस” का अर्थ है कैदी रिहाई दिवस। बड़ी दूर से श्रद्धालु इस पावन अवसर को बहुत धूम धाम से मनाने पॅहुचते हैं । तभी से अमृतसर की दीवाली काफ़ी चर्चित हो गई जैसे कहा जाता है -‘‘दाल रोटी घर की दीवाली अमृतसर की”।

दीपावली त्यौहार के लाभ

दीपावली एक ऐसा त्यौहार है, जो कि बहुत बड़े पैमाने पर मनाया जाता है | इसको मनाने से लोगों को काफ़ी लाभ होता है |

  1. दीवाली के दिन लोग बहुत सारा नया सामान अपने घरों के लिये खरीदतें हैं, जिससे व्यापारियों को लाभ होता है |
  2. लोग अपने रिश्तेदारों और मित्रों को मिठाईया बाटते हैं, जिससे आपसी प्यार बढ़ता है |
  3. इस त्यौहार के आने से पहले ही लोग अपने घरों पर साफ़-सफाई करना शुरू कर देते हैं, जिससे घर साफ़ सुथरा लगने लग जाता है | कभी – कभी हमें सफाई करते ऐसी चीजें मिल जाती हैं जिनको हम रख कर भूल जाते हैं | सफाई करने से हमारे आस-पास का वायु-मंडल भी शुद्ध होता है, जिससे हमारा स्वास्थ भी ठीक रहता है।
  4. दीपावली के दिनों में हमें मिट्टी के बने हुए कई रंग बिरंगे सामान देखने को भी मिलते हैं |
  5. इन दिनों सामान भी हमें सस्ती क़ीमतों पर मिल जाता है |

दीपावली से नुक़सान

हम दीवाली का त्यौहार मनाते हैं, ताकि हमारे जीवन में खुशियाँ आये परन्तु यह हमेंशा सम्भब नहीं हो पाता जिसके कई कारण हैं:

  1. अमीर लोग दीवाली पर बहुत ख़र्चा करतें हैं, जिन्हें देखकर ग़रीब लोग भी अपनी आमदन से ज्यादा ख़र्चा करने लग जाते हैं |
  2. पटाखों को चलाने से वायु प्रदुषण होता है जिससे साँस लेने में दिकत, हृदय रोगियों, और बज़ुर्गों को काफ़ी मुश्किल मुश्किलों का सामना करना पड़ता है | 
  3. बहुत सी मिठाईया और तला हुआ खाना खाने से स्वास्थ्य बिगड़ जाता है |
  4. बिजली की रोशनी की सजावट करने से बिजली की बर्बादी होती है।
  5. कई बार पटाखे चलाने से बहुत लोगो का नुक्सान भी हो जाता है जैसे: हाथ में ही पटाखे फटना, किसी के घर में ही आग लगना, साँस लेने में तकलीफ़ होना, आँखों में पटाखों का चला जाना इत्यादि |

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उपसंहार दीपावली पर निबंध (Diwali Essay in Hindi)

दीपावली के त्यौहार मनाने से हम सभी को बहुत प्रसन्ता होती है और नया साल अच्छे से निकले इसकी भगवान से प्रार्थना करतें हैं | परन्तु कुछ इस दिन जुआ खेलतें, शराब पीते हैं और समाजिक बुराइओं को बढ़ावा देते हैं जिससे हमारी सांस्कृति को नुक्सान होता हैं | इन सभी बुराइओं से हमें बचना चाहिये, और पटाखों के ऊपर ज्यादा पैसा बर्बाद नहीं करना चाहिये | पटाखे चलाने से पर्यावरण और हवा में बहुत प्रदूषण फैल जाता है जिससे बुज़ुर्गो को बहुत परेशानी है | इससे अच्छा है कि हम किसी ग़रीब व्यक्ति की मदद कर दे | 

हमें स्वदेशी बनना होगा और घर में रोशनी करने के लिए चाइनीज़ लाइट्स (लड़ियों) का इस्तेमाल बंद करके मिट्टी के दीयों का प्रयोग करना चाहिए | जिससे रोज़गार बढ़ेगा और गरीबी दूर होगी |  त्यौहार देश की सबसे बड़ी संपत्ति है इसे मिलजुलकर मनाना चाहिए हमें कोई भी ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए जिससे किसी को भी नुक्सान पहुंचे | 

निष्कर्ष दीपावली पर निबंध (Diwali Essay in Hindi)

हम इस ब्लॉग – दीपावली पर निबंध – Diwali Essay in Hindi का सार जानने का प्रयास करते है| 

  • दीपावली शब्द दो अक्षरों के मेल से बना है ‘दीप’ और ‘आवली’ जिसका अर्थ है दीपों का समूह |
  • इस दिन भगवान श्री राम चंद्र जी 14 वर्ष का वनवास काटकर माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ अपनी जन्मभूमि अयोध्या वापिस आये थे |
  • दीपावली दशहरे के 20/21 दिन बाद आती है |
  • हिन्दू रीति – रिवाज़ों के अनुसार हिन्दू लोग दीपावली को पांच दिनों तक मनाते हैं, जैसे – धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा, और भाई दूज |
  • सिख दीपावली बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाते है।

मुझे उम्मीद है कि इस ब्लॉग दीपावली पर निबंध (Diwali Essay in Hindi) को पढ़ कुछ महत्वपूर्ण जानकारी मिली होगी।
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